Sunday, 14 December 2014

ठंड का मिज़ाज न जाने कैसा है

ठंड का मिज़ाज न जाने कैसा है
बंगले वाले लोगो से ठण्ड कुछ अलग से पेश आती है
बिना घर वालो से कुछ अलग से पेश आती है
ठण्ड का मिजाज़ न जाने कैसा है....

जिनके पास कंबल,कोट और हीटर है
ठण्ड उन्हें क्यों ज्यादा सताती है,
जो तन पर कपड़े को तरसे क्या?
ठण्ड उन्हें नहीं चुभती
सर्द रातो में खुले असमान के नीचे सिमट कर सोते लोगो का
ठण्ड से दोस्ती का रिस्ता लगता है
जब घर वाले साधन संपन्न होने के वावजूद अपने घरो में
ठिठुर रहे होते है, बिना घर वाले
ठण्ड को अपने पास बैठाए सोते है

सड़क या दूर किसी गरीब गाँव के बच्चे
ठण्ड में भी आधे बदन घूमते है
तो सोचती हूँ न जाने ठण्ड का मिजाज़ कैसा है
इन्सान की हेसियत देखकर काम या अधिक लगती है

कोई आग ताप कर बदन गरम करता है
किसी की पेट की आग बदन को हमेशा गरम रखती है
ठंड का मिज़ाज न जाने कैसा है?

रिंकी...


Monday, 1 December 2014

Promise yourself


Promise yourself to be so strong that nothing can disturb your peace of mind
Promise yourself to talk health, happiness and prosperity to every person you meet

Promise yourself to make all your friends feel that there is something in them
Promise yourself to think only of the best, to work only for the best, and to expect only the best

Promise yourself to be just enthusiastic about the success of other as you are about your own.

Promise yourself to forget the mistake of the past and to press on to the greater achievement of the future.

Promise yourself to wear a friendly countenance at all times and give every living creature you meet a smile.

Promise yourself to spend so much time improving yourself that you have no time left to criticize others.

Promise yourself to be too large for worry, too noble for anger, too strong for fear, and too happy to permit the presence of trouble.

By- Christian D. Larsen


Watch your Thoughts

Watch your Thoughts

Watch your thoughts, they becomes your words.
 Watch your words, they become your actions.

Watch your action, they become your habits.
Watch your habits, they becomes your character.

Watch your character, they become your destiny.


By unknown

Friday, 31 October 2014

तेरे ही आँखों में पाया था जहान सारा


तेरे ही आँखों में पाया था
जहान सारा
जैसे भटके हुए नाव को
मंजिल का सहारा


राते अँधेरी सी थी
तू बन के जुगनू सा जला
तपते थे दिन मेरे
तू था ठंडी फुहार लिए

तेरी ही आँखों में देखा था
जादू से भरी दुनिया का सच,झूठ से भी परे
ज़िन्दगी का नज़ारा

मेरे हर रास्ते का मंजिल तू
तुझे चाहते रहना कुछ ऐसा
जैसे हर रात टूटते तारो को ताकना और गिनना

चार दिनों की छोटी ही कहानी थी प्यार की
तेरा देखना और मेरा खो जाना
जैसे घर से बहार गए मुसाफिर का
दुबारा लोट कर न आना

राह देखता आंगन
खुला दरवाज़ा
कहा रहे हो
तेरी ही रंग से भरा है
मेरा खाली मन सारा
तेरे ही आँखों में पाया था
जहान सारा



रिंकी

Saturday, 20 September 2014

मेरा नाम

बेटी शब्द मेरी पहली पहचान
बहन, कहलाना दूसरी पहचान बनी
पत्नी,बहु,माँ.भाभी अदि कई
नामों से मैं पहचानी जाती हूँ

मेरे अपने नाम का कोई अर्थ
मुझे इस समाज में नज़र नहीं आता
दुनिया मुझे रिश्तो के चश्मा से ही
देखा करती है

 आखरी बार कब सुना था अपना नाम
क्या कभी किसी ने मुझे मेरे नाम से पहचाना
पुकारा था,याद नहीं आता

मैं भी चाहती हूँ
मुझे भी दुनिया पहचाने
मेरे नाम से मुझे जाने
मेरा नाम बने मेरी पहचान

Rinki

Monday, 7 July 2014

पिया

बंद दरवाज़ा देखकर
लौटी है दुया
आंख खुली तो जाना ख्याव और सच है क्या?

धीमे-धीमे दहक रहे है,आँखों में
गुजरे प्यारवाले पल
राख हो कर भी सपने
गर्म है
बुझे आच की तरह

बर्फ में जमे अहसास
मानो धुव में ठहरे
दिन –रात की तरह

चुपी ओढे बैठी
चहरे पर सजाए मुस्कराहट
प्यार का मोती खोया
मन की गहराईयों में जाने कहा ?

Monday, 26 May 2014

रिमोट कण्ट्रोल ईज मिस्सिंग ... लापता की खोज

चुनावी मौसम का असर चारों तरफ तपती धूप की तरह महसूस की जा सकती थी I बच्चे-बच्चे के जुबान से इस बार नेता जी का नाम सुना जा रहा था,देखते ही देखते
चुनावी गहमा गहमी परिणाम के दिन मे बदल जाया I सारे देश के दिगाजो की किस्मत का पिटारा खुलने वाला था I मैंने बाहर का सारा काम छोड़ टी.वी नामक बक्से के आगे आंखे गड़ाकर बैठने का फेसला कर लिया था I परिणाम सुनने की बेताबी सड़क पर भी नज़र आ रही थी, खाली सुनी सडक इस बात को समझने के लिए पर्याप्त संकेत दे रही थी, सभी आम लोग पिटारे के जिन को देखना चाहते थे I जल्दी ही धीरे-धीरे देश के करता-धर्ताओं का भविष्य नज़र आने लगा “टी.वी” आधुनिक युग का “संजय” लगने लगा था जैसे संजय हस्तिनापुर में बैठे-बैठे कुरुक्षेत्र में हो रहे युद्ध को देखकर धृतराष्ट्र को युद्ध का हाल बताता था वैसे ही टी.वी नामक यंत्र हमें चुनावी हाल बता रहा था मेरे मन में अचानक सवाल उठा की यहाँ धृतराष्ट्र कौन है?,फिर लगा की आज के लिए ये गंभीर विषय नहीं है की धृतराष्ट्र कौन है?

चारो तरफ बिखरी खबरों में मुख्य चर्चा का विषय था सुनामी का आना, इतिहासकार कहते है की पिछले तीस साल में देश में पहली बार ऐसा हुआ है की किसी पार्टी को पूरा बहुमत मिला हो I अब आप कहेगे ये तो सब जानते है,तो मैं आपकी बातो से सहमत हूँ I
अब सवाल यहाँ उठाता है की मतदाता का मत इतना बदल कैसा सकता है I इस सवाल का  हिसाब-किताब मेरे बस की बात नहीं थी, तो मैंने सोचा लोगो से बात की जाए और खासकर उनसे जिन्हें वोटर बैंक कहा जाता है I इसी सिलसिले में एक ग्रामीण महिला से बात करके पता चला की उसके दस लोग के परिवार ने मिलकर लगभग अठाहरा वोट दिया है I मैंने यह सुनते ही सवाल दाग दिया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम में ऐसा कैसे किया जा सकता है ,उनसे बताया हमें कहा गया था हमने किया,इसके बाद मेरा दूसरा सवाल था तो ज्यादा वोट किसे दिया आपके परिवार ने? “वोट हमने अपने नेता को भी दिया पर काम क्यूंकि सब को पता था की इस बार नेता जी को ज्यादा वोट मिलने की उम्मीद नहीं है I ’सरकार बनाने के लिए वो ज़रूर केंद्र के सरकार से मिल जाएगे, उसने जबाब दिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहने लगी ‘जब से देल्ही मे वो सरकार बैठी है महगाई-महगाई की तरह भाग रही है’,दस साल पहले चीनी का दाम और अभी का दाम कितना बढ़ गया है I वो अपनी बात कही जा रही थी;  ‘ये सरकार बस नौकरी करनेवाले का वेतन बढ़ा रही है और उसका नुकसान हम मजदूरों को उठाना पड़ता है इसलिए अपने नेता जी के लक्षण पहचान कर उन्हें वोट कम दिया जिसका बोल- बाला था उसे वोट मिला आखिर में उसने एक बात को जोर देकर कहा ‘देश की जनता की फिक्र विदेशी को कैसे होगी’? उसके सवाल का जबाब मेरे पास नहीं था मेरी चुपी से वो समझ गई I

सवालो के जबाब जानने के क्रम में मेरे ड्राईवर ने भी अपने मत रखा उसने इससे पहले की सरकार के गिरने का कारण भी बताया उसने बताया की, जिस किसी सरकार ने धर्मं के काम में रोक डाली वो गिर गई I पहली सरकार के लोगो ने एक मंदिर का स्थान बदल दिया था,और इस सरकार ने समय से पहले माता का विसर्जन करा दिया इसलिए नेता जी को वोट नहीं मिले है लोगो से बात करके इतनी तो समझ बनी थी,की ग्रामीण जनता के पास अपने तर्क और कारण है सरकार बनाने या गिराने के I
चुनाव के दो दिन बीत जाने के बाद देल्ही से उड़ती-उड़ती ख़बर आने लगी थी की केंद्र का रिमोट कंट्रोल डिवाइस खो गया है I मैंने खबर की पुष्टि के लिए न्यूज चेनलों और अखबारों की खाक छानी पर कुछ नहीं मिला अब मेरे सामने सवाल था, की किस रिमोट कंट्रोल डिवाइस की बात लोग हँसी-मजाक में कर रहे है? ‘तो फिर मेरे अंदर का फालतू शोधक खुजली करने लगा’ खोज के लिए  मुझे अपने देश से बहुत दूर जाना पड़ा पर कुछ भी हाथ न लग बस एक लोक प्रचलितं कहानी सुनाने को मिली उसे पढ़कर आप भी अपना सामान्य ज्ञान को चोपट कर सकते है, तो कहानी ये है की I


अंतरीक्ष में रुसी अन्तरिक्ष यात्री(खगोली यात्री) को एक एलियन मिला उसके पास एक डिवाइस(यंत्र) था ,जिसे रुसी अंतरिक्ष यात्री ने एलियन से छीन लिया, उस यंत्र की खसियत थी की उससे इंसान को कंट्रोल किया जाया जा सकता था,पर उसमे एक खामी थी की डिवाइस से केवल पास खड़े इन्सान को ही कंट्रोल किया जा सकता था,इसलिए रूसी लोग सोचने लगे इसका प्रयोग कहाँ किया जाए I तभी रुसी लोगो को पता चला की पास के देश में उनकी देश की लड़की ने बहुत नाम कमाया है I उसे समानित करने के लिए एक सहमति बनी,उस रुसी लड़की को देश का सबसे बड़ा सम्मान दिया गया और उस यंत्र(डिवाइस) को प्रयोग में लाने के लिए उसे सौप दिया गया I लोककथा इससे से आगे की कहानी भी बताती है I

जब उस लड़की ने अपने ससुराल में जाकर सता संभाली तो,खुद जद्दी में न बैठकर ऐसे आदमी को गद्दी पर बैठाया जिसने कभी कही से भी राज्य नहीं किया था,क्यूंकि लड़की को अपने विदेशी होने के कारण जनता द्वारा अस्वीकार किये जाने का डर था I इसलिए उसने ऐसा किया और राज्य करने लगी रिमोट कंट्रोल डिवाइस अपना काम बखूबी तरीके से कर रहा था, और दस साल के राज्य के बाद वो दिन आया जिसे चुनाव कहते है परिणाम का भी दिन आ गया रिमोट कंट्रोल की सरकार हवा होगई परिणाम के दो दिन के बाद देल्ही में हंगामा सुनाने में आया की रिमोट कंट्रोल खो गया है I

अब रिमोट कंट्रोल की तलाश में देश की सीबीआई आदि तंत्र को खोज में लग गए बहुत ढूढने के बाद रिमोट कण्ट्रोल नहीं मिला,तभी एक साधारण आदमी ने सबको बताया की खबरे आ रही है की अपनी हार से बोखलाए मंत्री ने इस्तीफा दे दिया और किस को अपना पद दे दिया है I
इस घटना के बाद बात कुछ-कुछ समझ में आने लगी की थी बुद्धिमान आम जनता को, अब देखना बाकि है की  रिमोट कंट्रोल का इस्तमाल कैसे होता है?



Sunday, 27 April 2014

माया जाल

ईट पत्थर जोड़कर
मकान लिया बनाएं
दरार पड़ी है
हर रिश्ते में
मकान मेरी मेहनत का
मुझे घर जैसा नज़र
न आए

पोथी पढ़-पढ़
मंत्र रट-रट
रिश्ते में बांध गए
मन में मेरे गाठ
प्रेम की बांध
सका न कोई


जो बात दो दिलो
के बीच होनी थी
उसी रिवाज़ में
गढ़ दिया
अग्नि कुंड की वेदी
ने मेरे होने की
उम्मीद को जला दिया

Friday, 25 April 2014

आँखों से बात

तुम से मुलाकात फिर न होगी
जिंदगी में लोंग तो आते रहेगे
पर तेरे-मेरे आँखों में
जो छुपकर होती थी बात

अब किसी ओर के साथ न होगी

Tuesday, 8 April 2014

भाषा ख़ामोशी की



शब्द तूफान न ला दे
शायद इसी डर से हर इंसान
अपनी ज़िन्दगी में खमोशी ओढे खड़ा है

ख़ामोशी है या गहरे मन के
कोने में दबा कोई दर्द छिपा है
जो चुप-चाप रह कर छुपने की
कोशिश  कर रहा  है

शब्द शून्य बन गए तो क्या
मेरे भीतर अभी भी भावनाओ का

लावा सा बहा रहा है

Sunday, 16 March 2014

होली के रंग

लाल,हरा,नीला और पीला

रंग लगाए कुछ ऐसा
मन का मैल,नफ़रत
आपसी भेद- भाव
सब मिटे
रंग चढ़े इस होली में कुछ ऐसा

चेहरों पर लिखी जात-पात
ऊँच-नीच,आम और खास के
रंगों में बंधी दुनिया
होली के पर्व में लगाए सब को रंग एक जैसा

होली में रंगे मन सुनहरे फूल
कैसर के रंग जैसा
रंग चढ़े इस होली में कुछ ऐसा

Saturday, 15 February 2014

शब्द छूले तुम्हे मेरे

छोड़ दूँ या रहने दूँ
तुम्हे आवाज़ दूँ या
ख़ामोशी को ही कहने दूँ

शब्द छूले तुम्हे मेरे
या आँखों को ही प्यार का सन्देश
भेजने को कह दूँ

दिल के सन्दुकरी में
अरमान कई छुपे है
धीरे-धीरे सब बोल दूँ....

कोई पुकारता नहीं फिर भी
आवाज़ सुनती हूँ
कोई बंधन नहीं
फिर भी कैद तुझ
में हूँ

सपने देखू तेरे ही मैं
दिन में खुली आँखों से,
हाथ बढ़ा चाहू छूना तुझे
तुम हो जाते गुम

दिल के सन्दुकरी में
अरमान कई छुपे है
धीरे-धीरे सब बोल दूँ...


पिया....

बंद दरवाज़ा देखकर लौटी है दुआ आँख खुली तो जाना ख्याव और सच है क्या धीमे-धीमे दहक रहे है आँखों में गुजरे प्यार वाले पल...