Saturday, 15 February 2014

शब्द छूले तुम्हे मेरे

छोड़ दूँ या रहने दूँ
तुम्हे आवाज़ दूँ या
ख़ामोशी को ही कहने दूँ

शब्द छूले तुम्हे मेरे
या आँखों को ही प्यार का सन्देश
भेजने को कह दूँ

दिल के सन्दुकरी में
अरमान कई छुपे है
धीरे-धीरे सब बोल दूँ....

कोई पुकारता नहीं फिर भी
आवाज़ सुनती हूँ
कोई बंधन नहीं
फिर भी कैद तुझ
में हूँ

सपने देखू तेरे ही मैं
दिन में खुली आँखों से,
हाथ बढ़ा चाहू छूना तुझे
तुम हो जाते गुम

दिल के सन्दुकरी में
अरमान कई छुपे है
धीरे-धीरे सब बोल दूँ...


Monday, 10 February 2014

बचपन का विश्वास



विश्वास की कोई सीमा नहीं होती ओर जब कोई विश्वास को दायरे में बांधने की कोशिश करता है तो विश्वास वही खत्म हो जाता है ,आंख बंद कर कैसे किसी पर विश्वास करे ये मैंने एक पांच साल के बच्चे से सीखा में ओर वो दोनों खेल रहे थे खेल –खेल में वो मेरी पीठ पर अचानक से कूद पड़ा मैंने गिरते हुए उसे संभाला ओर गुस्से से पूछा अगर तुम गिर जाते तो  उसने बड़े प्यार से कहा मुझे पता है आप के होते में नहीं गिरूंगा आप मुझे नहीं गिरने देगी उसके इस जवाब के अन्दर मुझसे ज्यादा विश्वास भरा था की में उसे किसी भी हालत में गिरने नहीं दूंगी.

उसके जवाब ने मुझे जैसे झंझोर दिया मैं सोचने लगी हम बड़े उस निराकार पर भी डर-डर कर विश्वास करते है की कही विश्वास टूट ना जाए...

Thursday, 6 February 2014

नहीं आसन मिटाना तेरी याद ..

समय के गलियारे में
खुबसूरत से याद मारे-मारे
फिरते  है,
सोचा कैद करू सदूक में
पर ये तो
मेरी तरह मलंग
स्वतंत्र लगते है

चुभते बनके शुल
कभी चुभे तो टपके खून
न आंसू बहे, न आह! निकले
खामोशी से मेरी जान निकले

बताना भी मुश्किल
छिपना नहीं आसन
भीतर –भीतर जलाके के
खाक करे मुझे
बुझाना नहीं आसन
कैसे मिटाऊ तेरी याद

नहीं आसन मिटाना तेरी याद ...


Sunday, 2 February 2014

तेरे प्यार में


ये असर है दुआओ का
मेरे आँखों को तेरा दीद हुआ
मेरा दिल तो पहले से घायल था
आज से तेरा मुरीद हुआ

छुप –छुप कर देखना
नसीब में सब के नहीं
जिसे मिली ये दौलत
वोही सूफी फ़क़ीर हुआ

तेरे प्यार में दिल,ऐसा मजबूर हुआ
एक अच्छा इंसान,इस शहर में दीवानों के

नाम से मशहूर हुआ

Rinki 

पिया....

बंद दरवाज़ा देखकर लौटी है दुआ आँख खुली तो जाना ख्याव और सच है क्या धीमे-धीमे दहक रहे है आँखों में गुजरे प्यार वाले पल...