Sunday, 27 April 2014

माया जाल

ईट पत्थर जोड़कर
मकान लिया बनाएं
दरार पड़ी है
हर रिश्ते में
मकान मेरी मेहनत का
मुझे घर जैसा नज़र
न आए

पोथी पढ़-पढ़
मंत्र रट-रट
रिश्ते में बांध गए
मन में मेरे गाठ
प्रेम की बांध
सका न कोई


जो बात दो दिलो
के बीच होनी थी
उसी रिवाज़ में
गढ़ दिया
अग्नि कुंड की वेदी
ने मेरे होने की
उम्मीद को जला दिया

Friday, 25 April 2014

आँखों से बात

तुम से मुलाकात फिर न होगी
जिंदगी में लोंग तो आते रहेगे
पर तेरे-मेरे आँखों में
जो छुपकर होती थी बात

अब किसी ओर के साथ न होगी

Tuesday, 8 April 2014

भाषा ख़ामोशी की



शब्द तूफान न ला दे
शायद इसी डर से हर इंसान
अपनी ज़िन्दगी में खमोशी ओढे खड़ा है

ख़ामोशी है या गहरे मन के
कोने में दबा कोई दर्द छिपा है
जो चुप-चाप रह कर छुपने की
कोशिश  कर रहा  है

शब्द शून्य बन गए तो क्या
मेरे भीतर अभी भी भावनाओ का

लावा सा बहा रहा है

प्रेम में मिलावट

only you प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था जब पेहली बार बचपन और यौवन के बीच हुआ धीरे-धीरे,जैसे-जैसे  प्रेम को ...