Saturday, 11 November 2017

पिया....



बंद दरवाज़ा देखकर

लौटी है दुआ
आँख खुली तो जाना ख्याव और सच है क्या

धीमे-धीमे दहक रहे है
आँखों में गुजरे प्यार वाले पल
राख हो कर भी सपने
गर्म है
बुझे आंच की तरह

बर्फ में जमे अहसास
मानो धुवा में ठहरे
दिन –रात की तरह

चुपी ओढे बैठी में
चेहरे पर सजाए मुस्कुराहट
प्यार का मोती खोया
मन की गहराईयों में जाने कहा

बंद दरवाज़ा देखकर
लौटी है दुआ


रिंकी















Sunday, 29 October 2017

इंडिया से हारता भारत



भारत फिर इंडिया से हार गयाI किसी खेल में नहीं  बल्कि ज़िन्दगी से  मध्य प्रदेश  में  एक लड़की ने भूख के कारण अस्पताल के बाहर दम तोड़ दियाI  वो तो मीडिया ने खबर प्रसारित कर दी, नहीं तो ऐसे न जाने कितने लोग भूख के वजह से मर रहे है, पर किसी को पता नहीं चलता कोई खबर नहीं छपतीI  भारत में  आदिवासी और अनुसूचित जाति में शामिल लोग शायद ही इंडिया के बारे में जानते होंगेI भारत में भुखमरी, बेरोज़गारी, इलाज के बिना मरते लोग, शिक्षा,पानी,मकान और बहुत कुछ को तरसते लोग निवासी करते हैI डिजिटल इंडिया,शनिंग इंडिया,मेक इन इंडिया आदि शब्द आज–कल बहुत प्रचलन में है, नेता अक्सर इंडिया को बनाने की बात अपने मन से करते है, मन तो मन है क्या पता कब बदल जाएI अब भारत की बात करते है,भारत वो जगह जहा इंडिया की ६०% आबादी रहती हैI  वो आबादी जो  भारत में रहते हुए इंडिया के लिए काम करती है, भारत में रहनेवाले लोगो को इंडिया की शायद ही कोई खबर हो क्यूंकि वो किसान, मजदूर और छोटे-मोटे रोज़गार करनेवाले लोग है,और इंडिया के लोग नेता, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग हैI


भारत का रैंकिंग दुनिया के बनाम

सामाजिक विकास सूची- २०१७
भारत का स्थान- 93, 123 देश में
संयुक्तराष्ट्र विकास सूची
भारत का स्थान- 131, 188 देश में
लिंग असमानता सूची
भारत का स्थान श्रीलंका और मालदीव्स से पीछे
विश्व भुखमरी सूची-२०१७
भारत का स्थान-100,119 देश में



भारत हर तरफ से इंडिया से बहुत पीछे हैI जो लोग भारत में रहते है उनके लिए रोज़ का खाना जुटा पाना जंग से कम नहीं, कई लोग रोज़ बिना खाना खाए सो जाते है, भूख से हुई मोत को साबित करना आसान नहीं क्यंकि,अक्सर भूख से हुई मोत को किसी बीमारी से हुई मोत से जोड़ दिया जाता हैI भारत में भुखमरी बहुत बड़ा कारण  है बच्चो और गर्भवती महिलाओं की मोत के लिएI



आप और मैं क्या कुछ कर सकते है? की भारत के मरते भूखे लोगो को बचाया जा सकेI कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख के हम मदद कर सकते है,खाना बर्बाद नहीं करे, दुनिया का सबसे बड़ा अपराध होता है की खाना बर्बाद करनाI भारत और इंडिया को जोड़ने की  सेतु बनेI




रिंकी


Thursday, 19 October 2017

दिवाली मङ्गलमय हो

धन बरसे उमंग बरसे
दीवाली में, हर तरफ से
माँ लक्ष्मी की आप पर
कृपा बरसे।

कुछ दीये बाज़ार से ज्यादा
ख़रीदे ताकि उसका घर भी
जगमगाये जिसने दीया है
बनाये

माँ लक्षमी की आप पर कृपा बरसे
शुभ दीपावली

रिंकी

Sunday, 8 October 2017

कल्पवृक्ष ! है हम सभी


बहुत देर तक चलते रहने से वो थक गया थाI एक विशाल पेड़ के नीचे आकर उसने कहा आराम कर लेता हूँ और उसका मन और शरीर थकान से मुक्त हो गयाI उसके मन में आया की भोजन किया जाए और उसने स्वयं से कहा खाना खाते है, उसके सामने गरम-गरम ताज़ा भोजन था जिसे उसने खाया,पानी पीने की तलब उठी, फिर उसने स्वयं से कहा पानी पीते है और बहुत मीठा अमृत स्वाद सा पानी उसने पीयाI भोजन और पानी पीने के बाद उसने कहा, सो जाता हूँ और वो गहरी नींद में चला गयाI

सो कर उठा तो सोचने लगा कुछ तो गड़बड़ है इस जगह में उसने जो सोचा और क्रिया की वो पा लिया भोजन,पानी और नींदI उसने पेड़ को देखा और कहा, लगता है पेड़ पर भूत है और इतना कहते ही भूत प्रकट हो गएI डर से उसने कहा  मैं तो मर गया और वो मर जाता हैI हमारे मन के विचार सबसे शक्तिशाली चीज़ है आप जैसा सोचेगे वो ही पायेगेI



जीवन बहुत ही संभवनाओ से भरा है, जीवन का एक सीधा-साधा सा रहस्य है की जो चाहिए उसमे जीये, उस आदमी को जब भोजन चाहिए था तो उसने ये नहीं कहा की मुझे भोजन चाहिए बल्कि उसने कहा खाना खाते है और उसे भोजन मिल गयाI

प्रकृति हमारे जीवन में ठीक ऐसे ही हिसाब से काम करती हैI आप विश्वास करे या न करे प्रकृति को कोई फर्क नहीं पड़ता वो बस अपना काम करती हैI जो चाहिए उसे पाया हुआ सोचिएI हम सब उस कल्पवृक्ष की तरह है, जो सारी इच्छा पूरी करता हैI हम सभी कल्पवृक्ष ही हैI



रिंकी

Thursday, 21 September 2017

प्रेम में मिलावट

only you

प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था
जब पेहली बार
बचपन और यौवन के बीच
हुआ

धीरे-धीरे,जैसे-जैसे  प्रेम को
समझने की कोशिश की
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

दोस्तों ने अपने रंग भरे
कवि,गायक और फिल्म का
रंग चढ़ता गया
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

होश संभाला तो लगा
प्रेम फैशन जैसा है
सब के पास होने लाज़मी था
तो मैंने भी
मोबाइल, कार और ज़ेवर जैसा रख लिया
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

ज़िन्दगी समझ में आई जब
तब लगा प्रेम को शादी कहते है
और मैंने भी प्रेम कर लिया
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

जब ज़िन्दगी कट रही थी
तब लगा इसे ही प्रेम कहते है
जब दो इन्सान सिर्फ साथ रहते है

ज़िन्दगी की दौड़ लगभग खत्म होने को है
लगता है  प्रेम को समझ पाना मुश्किल नहीं था
बस करना इतना था की
दुनिया की समझ से अपने प्रेम को
बचाए रखना था
जिसे मैंने प्रेम समझा
वो सिर्फ लोगो के विचार थे


दुनिया ने जिसे प्रेम माना वो प्रेम नहीं था
अगर होता तो वो
मुझे दायरे में रहा कर प्रेम करने को नहीं कहते
किसी जात,धर्म और देश से जोड़ कर प्रेम को नहीं देखते
बंधन को प्रेम नहीं कहते
दुनिया अपनी स्वर्थ को
प्रेम कहता रहा
और प्रेम मिलावटी होता गया

प्रेम को भी बाज़ार में
उम्र,जात,धर्म, औकाद के हिसाब से
मिलावट कर बेचा गया
प्रेम में  मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी  हो गया

रिंकी


Sunday, 10 September 2017

लेखक को मारना तो बहाना है, कोशिश तो विचारो को मारने की जा रही है...




आज-कल बेवाक लिखनेवाले डरे से नज़र आते है,उनके रिश्तेदार,चाहनेवाले उन्हें सलाह देते नहीं थकते की सभाल कर लिखा करो, पर लेखक बेचारा दुखी सताया हुआ प्राणी लिखे तो “वो” मर देगे न लिखे तो खुद मर जाए करे तो क्या करे? ऐसा नहीं है की इस देश में पहली बार किसी की हत्या की गई है, हमारे पुराणों में भी लिखा है “ सवाल हत्या करते है” अब ये बात किस संदर्भ में लिखी गई थी पता नहीं पर इसका प्रमाण तो है की अगर आप सवाल करेगे तो मरेगेI

दुनिया में यह पहली बार नहीं हो रहा है,की किसी विचारक की हत्या की गई हो अगर आपके विचार किसी की कमाई का जरिया,जनता,ज़मीन और सत्ता को बदलने की ताकत रखता है तो आपक मरना तय है, फिर कोई कानून,पुलिस आपको बचा नहीं सकतीI कुछ बुद्धिजीवियों को लगता है की सारा खेल किसी अमुक धर्म के लोगो का है, शायद ऐसा ऊपर से देखने से  लगता हो पर पूरा सच बहुत गहरे तह में छिपा हैI किसी के विचार अगर किसी भी ऐसे वयवस्था को चुनोती देती है जिससे समाज में क्रांति आ जाए उस विचार को मार दिया जाता हैI

दुनिया में विचार को दबाने के लिए इशु की हत्या कि गई, जब बुद्ध धर्मं अपने चरम पर था तो हत्या हुई, शैव और वैशनव भी लडे, आज -काल आतंकवाद के नाम पर विचारो  की हत्या की जा रही हैI

लेखक का शारीर मरता है,उसके विचार हमेशा अमर है

मुझे उन मुर्ख लोगो पर दया आती है जिन्हें लगता है, की किसी इन्सान को मार देने से सब ख़तम हो जाता है तो उन्हें कोई समझाएI विचार ठीक वायरस की तरह है एक से दुसरे में नियंतर बिना रुके किसी न किसी को प्रभावित करता रहता हैI तुम मरते रहो वो अपना रास्ता दूंदता हुआ सही व्यक्ति के पास पहुँच जाएगाI लेखक समुदाय को भी चाहिए की वो भक्त जैसा व्यवहार न करे ज्ञानी जैसे तर्क करे और सत्य को लिखेI

रिंकी

इस प्यार ने




तेरा क्या खोया, मेरे क्या गया?

इस प्यार ने जब सारी खुदाई ठग ली


जब किसी ने किस को प्यार से देखा

समझो प्यार ने उनसे उनकी ज़िन्दगी की
सारी कमाई ठग ली

Monday, 7 August 2017

वामनावतार रक्षाबंधन पौराणिक कथा

एक सौ 100 यज्ञ पूर्ण कर लेने पर दानवेन्द्र राजा बलि के मन में स्वर्ग का प्राप्ति की इच्छा बलवती हो गई तो का सिंहासन डोलने लगा। इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर लिया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुँच गए। उन्होंने बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांग ली।
बलि के गु्रु शुक्रदेव ने ब्राह्मण रुप धारण किए हुए विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किंतु दानवेन्द्र राजा बलि अपने वचन से न फिरे और तीन पग भूमि दान कर दी।
वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। तीसरा पैर कहाँ रखें? बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। यदि वह अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होता। आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए। वामन भगवान ने वैसा ही किया। पैर रखते ही वह रसातल लोक में पहुँच गया।
जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा। भगवान के रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बन कर निवास करेंगे तो बैकुंठ लोक का क्या होगा? इस समस्या के समाधान के लिए लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया। लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी यथा रक्षा-बंधन मनाया जाने लगा।


भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार  एक बार देवता और दैत्यों  (दानवों ) में बारह वर्षों तक युद्ध हुआ परन्तु देवता विजयी नहीं हुए। इंद्र हार के भय से दु:खी होकर  देवगुरु बृहस्पति के पास विमर्श हेतु गए। गुरु बृहस्पति के सुझाव पर इंद्र की पत्नी महारानी शची ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से व्रत  करके रक्षासूत्र   तैयार किए और  स्वास्तिवाचन के साथ ब्राह्मण की उपस्थिति में  इंद्राणी ने वह सूत्र  इंद्र की  दाहिनी कलाई में बांधा  जिसके फलस्वरुप इन्द्र सहित समस्त देवताओं की दानवों पर विजय हुई।


महाभारत में ही रक्षाबंधन से संबंधित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तांत मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था।








Source:-   https://www.bharatdarshan.co.nz/article-details/532/raksha-bandhan-history-stories.html

Monday, 31 July 2017

ख़त इन्सान के नाम


 
हे  पर्थ
याद रख ये बात
करता भी तू है
भरता भी तू है
भोगता भी तू है

मैं तो शुन्य हूँ
जिसे समझ पाना
तेरे बस की बात नहीं

तू काटे पेड़
दूषित करे जल
उजड़े धरती अपनी
जला दी तूने धरती सारी

और पूछाता है
मुझसे तू  की, मैं कहाँ हूँ

प्रकृति अपने नियम
से चलती है
बरसती, जलती,हवा हो तेज़ उडती

 तू  चाहता है प्रकृति को काबू करना
अगर वो संतुलन बनाने की लिए
रूद्र हो जाए

तो तू कहता है
इश्वर तू ने क्या किया

एक बात मैं फिर कहता हूँ
करता भी तू है
भरता भी तू है
भोगता भी तू है

रिंकी
 


Thursday, 27 July 2017

अच्छी दुल्हन


नई नवेली दुल्हन जब उसके जिंदगी में आई तो उसकी दुनिया स्वर्ग सी हो गईI वो बस उसको निहारता रहता और मन में हो रही गुदगुदी को छुपाते हुए मुस्कुरा देताI हर बात पर कहता मुझे बहुत अच्छी दुल्हन मिली है, अब साल होने को आया है, वो अपनी दुल्हन के साथ बहुत खुश हैI उनकी दुल्हन कुछ दिनों से परेशान सी दिखाई दे रही है,उसने कई बार कारण पता करने की कोशिश की पर दुल्हन चुप रहीI और एक दिन उसने कहा की उसकी आँखों और सर में दर्द  हैI
वो उसे डॉक्टर से चेक-उप करने ले गया I डॉक्टर ने दुल्हन से पूछा आपने चश्मा लगाना क्यूँ छोड़ दिया?

आपकी आँखों की रोशनी पर बहुत असर पड़ रहा है, दवाइयां और चश्मा लेने के बाद दोनों घर आए
उसने पूछा तुमने चश्मे वाली बात क्यूँ छुपाई? उसकी दुल्हन ने रोते हुए कहा,मुझसे माँ ने कहा था की किसी को मत बताना नहीं तो लोग तुझे अच्छी दुल्हन नहीं कहेंगेI

Friday, 21 July 2017

सौ में सतर आदमी


सौ में सतर आदमी...

सौ में सतर आदमी
पिलहाल जब नाशाद है
दिल पे  रखकर हाँथ कहिये
देश क्या आज़ाद है

कोठीयों से मुल्क की
मायर को मत अंकिये
असली हिंदुस्तान तो
फूटपाथ पर आबाद  है

सताधारी लड़ पड़े है
आज कुतो की तरह
सुखी रोटी देखकर
हम मुफलिसों के हाँथ में

जिस शहर के मुन्तजिम
अन्धे हो जल्वागाहा के
उस शहर में रोशनी की
बात बेबुनियाद है

जो उलझ कर रह गई है
फ़ाइल के जाल में
रोशनी  वो गाँव तक
पहुचेगी कितने साल में

सौ में सतर आदमी


 लेखक -अदम गोंडवी

Wednesday, 12 July 2017

लघु कथा- मानवता और मज़हव

उसकी बहन उसे बस पर चढ़ाने आई, शायद वो पहली बार अपने-आप यात्रा कर रही थीI उसने बहन से कहा की ड्राईवर और कंडक्टर से कहो की मुझे अन्धन्य मोड़ (उसका स्टॉप )पर उतार दे , बहन ने कहा दियाI बस चल पड़ी धीरे –धीरे यात्री उतारते  रहे उसने कंडक्टर से पूछा मेरा स्टॉप कब आयेगा, कंडक्टर ने भोला सा मुह बना कर कहा  ये बस उस रास्ते से नहीं जाती जहा आपको जाना है, आपको बस बदलनी होगीI  फिर तो बस में ग़दर मच गया उस औरत को जीतनी गलियाँ आती थी उसने ड्राईवर और कंडक्टर को दे दी I सह यात्रियों ने सहानभूति जताई,कुछ लोगो ने जाने का रास्ता समझया पर समस्या ये थी की उसके पास रुपए नहीं थे, सब समझा रहे थे, तभी उसकी सीट के पीछे से एक महिला ने उसकी तरफ कुछ रुपए देते हुए कहा, रो नहीं हम आपके साथ हैI


लाल बिंदी,चूड़ी और साड़ी पेहनी उस महिला ने धन्यवाद भरी नज़रो से उस बुरखा पेहनी औरत को देखाI

Rinki


















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पिया....

बंद दरवाज़ा देखकर लौटी है दुआ आँख खुली तो जाना ख्याव और सच है क्या धीमे-धीमे दहक रहे है आँखों में गुजरे प्यार वाले पल...