Thursday, 21 September 2017

प्रेम में मिलावट

only you

प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था
जब पेहली बार
बचपन और यौवन के बीच
हुआ

धीरे-धीरे,जैसे-जैसे  प्रेम को
समझने की कोशिश की
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

दोस्तों ने अपने रंग भरे
कवि,गायक और फिल्म का
रंग चढ़ता गया
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

होश संभाला तो लगा
प्रेम फैशन जैसा है
सब के पास होने लाज़मी था
तो मैंने भी
मोबाइल, कार और ज़ेवर जैसा रख लिया
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

ज़िन्दगी समझ में आई जब
तब लगा प्रेम को शादी कहते है
और मैंने भी प्रेम कर लिया
प्रेम में मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी हो गया

जब ज़िन्दगी कट रही थी
तब लगा इसे ही प्रेम कहते है
जब दो इन्सान सिर्फ साथ रहते है

ज़िन्दगी की दौड़ लगभग खत्म होने को है
लगता है  प्रेम को समझ पाना मुश्किल नहीं था
बस करना इतना था की
दुनिया की समझ से अपने प्रेम को
बचाए रखना था
जिसे मैंने प्रेम समझा
वो सिर्फ लोगो के विचार थे


दुनिया ने जिसे प्रेम माना वो प्रेम नहीं था
अगर होता तो वो
मुझे दायरे में रहा कर प्रेम करने को नहीं कहते
किसी जात,धर्म और देश से जोड़ कर प्रेम को नहीं देखते
बंधन को प्रेम नहीं कहते
दुनिया अपनी स्वर्थ को
प्रेम कहता रहा
और प्रेम मिलावटी होता गया

प्रेम को भी बाज़ार में
उम्र,जात,धर्म, औकाद के हिसाब से
मिलावट कर बेचा गया
प्रेम में  मिलावट घुलता गया
प्रेम मिलावटी  हो गया

रिंकी


Sunday, 10 September 2017

लेखक को मारना तो बहाना है, कोशिश तो विचारो को मारने की जा रही है...




आज-कल बेवाक लिखनेवाले डरे से नज़र आते है,उनके रिश्तेदार,चाहनेवाले उन्हें सलाह देते नहीं थकते की सभाल कर लिखा करो, पर लेखक बेचारा दुखी सताया हुआ प्राणी लिखे तो “वो” मर देगे न लिखे तो खुद मर जाए करे तो क्या करे? ऐसा नहीं है की इस देश में पहली बार किसी की हत्या की गई है, हमारे पुराणों में भी लिखा है “ सवाल हत्या करते है” अब ये बात किस संदर्भ में लिखी गई थी पता नहीं पर इसका प्रमाण तो है की अगर आप सवाल करेगे तो मरेगेI

दुनिया में यह पहली बार नहीं हो रहा है,की किसी विचारक की हत्या की गई हो अगर आपके विचार किसी की कमाई का जरिया,जनता,ज़मीन और सत्ता को बदलने की ताकत रखता है तो आपक मरना तय है, फिर कोई कानून,पुलिस आपको बचा नहीं सकतीI कुछ बुद्धिजीवियों को लगता है की सारा खेल किसी अमुक धर्म के लोगो का है, शायद ऐसा ऊपर से देखने से  लगता हो पर पूरा सच बहुत गहरे तह में छिपा हैI किसी के विचार अगर किसी भी ऐसे वयवस्था को चुनोती देती है जिससे समाज में क्रांति आ जाए उस विचार को मार दिया जाता हैI

दुनिया में विचार को दबाने के लिए इशु की हत्या कि गई, जब बुद्ध धर्मं अपने चरम पर था तो हत्या हुई, शैव और वैशनव भी लडे, आज -काल आतंकवाद के नाम पर विचारो  की हत्या की जा रही हैI

लेखक का शारीर मरता है,उसके विचार हमेशा अमर है

मुझे उन मुर्ख लोगो पर दया आती है जिन्हें लगता है, की किसी इन्सान को मार देने से सब ख़तम हो जाता है तो उन्हें कोई समझाएI विचार ठीक वायरस की तरह है एक से दुसरे में नियंतर बिना रुके किसी न किसी को प्रभावित करता रहता हैI तुम मरते रहो वो अपना रास्ता दूंदता हुआ सही व्यक्ति के पास पहुँच जाएगाI लेखक समुदाय को भी चाहिए की वो भक्त जैसा व्यवहार न करे ज्ञानी जैसे तर्क करे और सत्य को लिखेI

रिंकी

इस प्यार ने




तेरा क्या खोया, मेरे क्या गया?

इस प्यार ने जब सारी खुदाई ठग ली


जब किसी ने किस को प्यार से देखा

समझो प्यार ने उनसे उनकी ज़िन्दगी की
सारी कमाई ठग ली

Monday, 7 August 2017

वामनावतार रक्षाबंधन पौराणिक कथा

एक सौ 100 यज्ञ पूर्ण कर लेने पर दानवेन्द्र राजा बलि के मन में स्वर्ग का प्राप्ति की इच्छा बलवती हो गई तो का सिंहासन डोलने लगा। इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर लिया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुँच गए। उन्होंने बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांग ली।
बलि के गु्रु शुक्रदेव ने ब्राह्मण रुप धारण किए हुए विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किंतु दानवेन्द्र राजा बलि अपने वचन से न फिरे और तीन पग भूमि दान कर दी।
वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। तीसरा पैर कहाँ रखें? बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। यदि वह अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होता। आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए। वामन भगवान ने वैसा ही किया। पैर रखते ही वह रसातल लोक में पहुँच गया।
जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा। भगवान के रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बन कर निवास करेंगे तो बैकुंठ लोक का क्या होगा? इस समस्या के समाधान के लिए लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया। लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी यथा रक्षा-बंधन मनाया जाने लगा।


भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार  एक बार देवता और दैत्यों  (दानवों ) में बारह वर्षों तक युद्ध हुआ परन्तु देवता विजयी नहीं हुए। इंद्र हार के भय से दु:खी होकर  देवगुरु बृहस्पति के पास विमर्श हेतु गए। गुरु बृहस्पति के सुझाव पर इंद्र की पत्नी महारानी शची ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से व्रत  करके रक्षासूत्र   तैयार किए और  स्वास्तिवाचन के साथ ब्राह्मण की उपस्थिति में  इंद्राणी ने वह सूत्र  इंद्र की  दाहिनी कलाई में बांधा  जिसके फलस्वरुप इन्द्र सहित समस्त देवताओं की दानवों पर विजय हुई।


महाभारत में ही रक्षाबंधन से संबंधित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तांत मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था।








Source:-   https://www.bharatdarshan.co.nz/article-details/532/raksha-bandhan-history-stories.html

Monday, 31 July 2017

ख़त इन्सान के नाम


 
हे  पर्थ
याद रख ये बात
करता भी तू है
भरता भी तू है
भोगता भी तू है

मैं तो शुन्य हूँ
जिसे समझ पाना
तेरे बस की बात नहीं

तू काटे पेड़
दूषित करे जल
उजड़े धरती अपनी
जला दी तूने धरती सारी

और पूछाता है
मुझसे तू  की, मैं कहाँ हूँ

प्रकृति अपने नियम
से चलती है
बरसती, जलती,हवा हो तेज़ उडती

 तू  चाहता है प्रकृति को काबू करना
अगर वो संतुलन बनाने की लिए
रूद्र हो जाए

तो तू कहता है
इश्वर तू ने क्या किया

एक बात मैं फिर कहता हूँ
करता भी तू है
भरता भी तू है
भोगता भी तू है

रिंकी
 


Thursday, 27 July 2017

अच्छी दुल्हन


नई नवेली दुल्हन जब उसके जिंदगी में आई तो उसकी दुनिया स्वर्ग सी हो गईI वो बस उसको निहारता रहता और मन में हो रही गुदगुदी को छुपाते हुए मुस्कुरा देताI हर बात पर कहता मुझे बहुत अच्छी दुल्हन मिली है, अब साल होने को आया है, वो अपनी दुल्हन के साथ बहुत खुश हैI उनकी दुल्हन कुछ दिनों से परेशान सी दिखाई दे रही है,उसने कई बार कारण पता करने की कोशिश की पर दुल्हन चुप रहीI और एक दिन उसने कहा की उसकी आँखों और सर में दर्द  हैI
वो उसे डॉक्टर से चेक-उप करने ले गया I डॉक्टर ने दुल्हन से पूछा आपने चश्मा लगाना क्यूँ छोड़ दिया?

आपकी आँखों की रोशनी पर बहुत असर पड़ रहा है, दवाइयां और चश्मा लेने के बाद दोनों घर आए
उसने पूछा तुमने चश्मे वाली बात क्यूँ छुपाई? उसकी दुल्हन ने रोते हुए कहा,मुझसे माँ ने कहा था की किसी को मत बताना नहीं तो लोग तुझे अच्छी दुल्हन नहीं कहेंगेI

Friday, 21 July 2017

सौ में सतर आदमी


सौ में सतर आदमी...

सौ में सतर आदमी
पिलहाल जब नाशाद है
दिल पे  रखकर हाँथ कहिये
देश क्या आज़ाद है

कोठीयों से मुल्क की
मायर को मत अंकिये
असली हिंदुस्तान तो
फूटपाथ पर आबाद  है

सताधारी लड़ पड़े है
आज कुतो की तरह
सुखी रोटी देखकर
हम मुफलिसों के हाँथ में

जिस शहर के मुन्तजिम
अन्धे हो जल्वागाहा के
उस शहर में रोशनी की
बात बेबुनियाद है

जो उलझ कर रह गई है
फ़ाइल के जाल में
रोशनी  वो गाँव तक
पहुचेगी कितने साल में

सौ में सतर आदमी


 लेखक -अदम गोंडवी

Wednesday, 12 July 2017

लघु कथा- मानवता और मज़हव

उसकी बहन उसे बस पर चढ़ाने आई, शायद वो पहली बार अपने-आप यात्रा कर रही थीI उसने बहन से कहा की ड्राईवर और कंडक्टर से कहो की मुझे अन्धन्य मोड़ (उसका स्टॉप )पर उतार दे , बहन ने कहा दियाI बस चल पड़ी धीरे –धीरे यात्री उतारते  रहे उसने कंडक्टर से पूछा मेरा स्टॉप कब आयेगा, कंडक्टर ने भोला सा मुह बना कर कहा  ये बस उस रास्ते से नहीं जाती जहा आपको जाना है, आपको बस बदलनी होगीI  फिर तो बस में ग़दर मच गया उस औरत को जीतनी गलियाँ आती थी उसने ड्राईवर और कंडक्टर को दे दी I सह यात्रियों ने सहानभूति जताई,कुछ लोगो ने जाने का रास्ता समझया पर समस्या ये थी की उसके पास रुपए नहीं थे, सब समझा रहे थे, तभी उसकी सीट के पीछे से एक महिला ने उसकी तरफ कुछ रुपए देते हुए कहा, रो नहीं हम आपके साथ हैI


लाल बिंदी,चूड़ी और साड़ी पेहनी उस महिला ने धन्यवाद भरी नज़रो से उस बुरखा पेहनी औरत को देखाI

Rinki


















👪👭

Thursday, 6 July 2017

मैं और तुम


मुझसे ये सवाल न पूछ
की
मैं कैसी हूँ?
मैं तो
रात जैसी हूँ
जो दिन के उजाले में
तुम्हे
दिखाई नहीं दूंगी

और
तुम हो वो सूरज हो
जो मेरे अन्दर कभी  ढलता
ही नहीं

यही फर्क है हम दोनो मे...




रिंकी

Tuesday, 27 June 2017

चाँद


ऐ चाँद तू है क्या?

कोई तुझे मामा कहता

किसी को लगे महबूब सा

चाँद बता तेरा मेरा रिश्ता क्या?

 कभी ईद का चाँद

कभी चोधावी का चाँद

और कभी करवा चौथ का चाँद


ऐ चाँद बता तेरा जात,धर्मं और पहचान क्या?

ऐ चाँद तू है क्या?


Rinki

Sunday, 11 June 2017

उन लडकियों की शादी.....


भारतीय समाज में शादी-विवाह का विशेष महत्त्व होता है, शादी को सबसे महत्वपूर्ण रस्म माना गया है, यह कितना महत्त्वपूर्ण विषय है और हर भारतीय के लिए कितना जरुरी है, ये मुझे कुछ ही समय पहले पता चलाI कहानी कुछ ऐसी है की  मेरे भाई का दो साल का बेटा जो तुतला कर बोलता है चलते–चलते गिर पड़ता है हर समय कुछ नया सिखने की कोशिश मे घर में तबाही मचाये रखता हैI उसके दादा जब भी उसके साथ खेलते है ,तो दो साल के अपने पोते को कहते है बड़ा हो कर तू दूल्हा बनेगा घोड़ी चड़ेगा और खूब सारा दहेज़ लेगाI  शादी की शिक्षा-दीक्षा बहुत ही छोटे उम्र से शुरू हो जाती हैI  हमारे देश में कोई कुछ बने या न बने दूल्हा –दुल्हन जरूर बनता हैI  लगता है शादी बहुत जरुरी है चाहे परिस्थिति किसी भी तरह की हो शादी से बढ़कर कुछ नहीं, गत दिनों मे कुछ घटनाएँ ऐसी घटी की मैं सोचने पर मजबूर हो गई की “क्या उन लडकियों की शादी बहुत जरुरी थी उस समय”?


पहली घटना

घर में शादी का खुशहाल मोहोल था, बाप-माँ ने बड़े ही कोशिशो से इतने संसाधन जुटा लिए थे की अपनी लड़की की शादी कर सके,लड़का ढूँढा गया, लड़के के घरवालो को लड़की और दहेज दोनों पसंद आए, शादी की तारीख तय हो गई हलाकि की लड़की की स्कूल की परीक्षा सर पर है पर शादी जरुरी हैI गरीब घर के बच्चों को जल्दी बड़ा होना पड़ता है ताकि को घर को संभाल सके इस लिहाज से वो लड़की भी बड़ी हो गई थी, अकेली बहन चार भाइयो में, वो तीसरे स्थान पर थी पर घरवालो के लिए वो सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी जिसे निपटाना जरुरी था I  शादी की ख़ुशी घर- आँगन,  रिश्तेदार और गाँव के लोग सब में एक सामान फली थी, रिश्तेदार-परिवार सब मिलकर काम कर रहे थेI छोटे से घर में ही सारा काम हो रहा था, कोई गीत गा रहा था,कोई शादी की रस्म निभा रहा था और उसी आँगन के कोने  में रसोइयाँ शादी की मिठाई बना रहे थेI मगंल गीत सुने दे रहे थेI मिठाईयां की खुशबू चारो तरफ फैली थीI

तभी किसी रसोइये के आवाज़ ज़ोर से सुनाई दी “सिलेंडर का रेगुलेटर बंद करो,जल्दी करो” जहाँ मिठाई बन रही थी उस जगह आग की बड़ी लपट दिखाई दे रही थी, आग एक  सिलेंडर से दुसरे मे इतनी जल्दी फैली की कोई कुछ कर ही न सका, सब भाग रहे थे, जैसे –तैसे सिलेंडर का रेगुलेटर बंद कर आग पर काबू पाया गया तब जाकर पता चला की कितना नुकसान हुआ है, शादी का सारा सामान राख होया गया था I घर लगभग आधा जल चुका थाI और मिठाई के पतीले में मिठाई की जगह इन्सान के मॉस तैर रहे थे, कोई ज़मीन पर पड़ा चिल्ला रहा था कोई होश में नहीं था, कुल मिलकर पन्द्रह लोग जले,लड़की के दो भाई और पिता समेतI शादी का घर अब मातम के घर में बदल चुका था, सभी घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया कुछ का इलाज कर के डॉक्टरों ने करीब दस घायलों को राज्य के  सबसे बड़े अस्पताल भेज दियाI
घर में मातम पसरा था कल शादी है, सब कुछ जल गया पिता –भाई  अस्पताल मे है, लड़की और उसका परिवार  सदमे में था क्या हो गया? शादी कैसे होगी? सब ने कहा की शादी रोक दी जाए पर कुछ लोगो के कहने पर शादी की तै तारीख को किसी दुसरे के घर में मंडप बनाया गया खाना का प्रबंध किया गया लड़की का कन्यादान गाँव के ही चाचा ने किया, शादी रोकी नही गई I शादी के दो दिनों के बाद लड़की के छोटे भाई की मौत हो गई, कुल मिलकर  छह लोग चल बसेI

इतनी बड़ी घटना के बाद भी लोगो ने शादी नहीं टाली, अधिकतर लोग शादी के पक्ष में नहीं थे पर जो थे उनका कहना था अगर इस लड़की की शादी आज नहीं होती तो कोई फिर इससे शादी नहीं करता उस लड़की को  एक अभिशाप माना जाता, इसलिए  उसकी शादी जरुरी थीI



दूसरी घटना

मेरे ही ऑफिस में काम कर रहे  व्यक्ति की है, उनकी बेटी जो अभी बारहवी में पढ़ रही है उसकी शादी तै थी,
वो बहुत अधिक नहीं कमाते घर का गुजरा गाँव से अनाज ,दाल,तेल, मसाले और सब्जी ला कर  करते  है ,रिश्तेदार के घर की देखभाल करते है इसलिए किरया नहीं देना पड़ता है, कुल मिलकर आठ-दस हज़ार की मासिक कमाई हैI
उनकी लड़की पढ़ने में अच्छी है,पर आजकल अधिकतर मोबाईल फोन पर अपने होने वाली पति से बात करती हुई देखाई देती हैI

जब शादी नजदीक आई तो उन्होंने सभी साथी कर्मियों से पैसे उधार देने को कहा, पूरे दस दिनों तक वो लोगो की खुसामती करते रहे की उन्हें पैसे उधार मिल जाए,कुलमिला कर शादी में दहेज के साथ पांच से सात लाख रुपए खर्च किया, उन्होंने क्या –क्या बेचा पता नहीं? पर अपनी बेटी की शादी की I पूछने पर बताया की अभी अगर शादी नहीं करेगें तो आगे और अधिक दहेज़ देना होगा इसलिए  उनकी लड़की की शादी जरुरी थीI

ऐसे बहुत से सवाल होते है जिसे समाज और कानून की कसौटी पर एक साथ नहीं तौला जा सकता, जब शादी की बात आती है तो परिस्थिति को देखकर लोग फैसला लेते हैI अक्सर शादी को भगवान का सबसे पुण्य काम मान कर किया जाता है I उस समय समाज और कानून को दरकिनार कर दिया जाता है

और  ऐसी शादी जरुरी होती जाती है ???????

Rinki


रिंकी

प्रेम में मिलावट

only you प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था जब पेहली बार बचपन और यौवन के बीच हुआ धीरे-धीरे,जैसे-जैसे  प्रेम को ...