Wednesday, 12 July 2017

लघु कथा- मानवता और मज़हव

उसकी बहन उसे बस पर चढ़ाने आई, शायद वो पहली बार अपने-आप यात्रा कर रही थीI उसने बहन से कहा की ड्राईवर और कंडक्टर से कहो की मुझे अन्धन्य मोड़ (उसका स्टॉप )पर उतार दे , बहन ने कहा दियाI बस चल पड़ी धीरे –धीरे यात्री उतारते  रहे उसने कंडक्टर से पूछा मेरा स्टॉप कब आयेगा, कंडक्टर ने भोला सा मुह बना कर कहा  ये बस उस रास्ते से नहीं जाती जहा आपको जाना है, आपको बस बदलनी होगीI  फिर तो बस में ग़दर मच गया उस औरत को जीतनी गलियाँ आती थी उसने ड्राईवर और कंडक्टर को दे दी I सह यात्रियों ने सहानभूति जताई,कुछ लोगो ने जाने का रास्ता समझया पर समस्या ये थी की उसके पास रुपए नहीं थे, सब समझा रहे थे, तभी उसकी सीट के पीछे से एक महिला ने उसकी तरफ कुछ रुपए देते हुए कहा, रो नहीं हम आपके साथ हैI


लाल बिंदी,चूड़ी और साड़ी पेहनी उस महिला ने धन्यवाद भरी नज़रो से उस बुरखा पेहनी औरत को देखाI

Rinki


















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